March 9, 2026

मनरेगा का नया स्वरूप ‘VB G RAM G’ मजदूरों के लिए ‘मौत का वारंट’: तरुण खटकर।

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रायपुर 02 फरवरी 2026 | राजीव गांधी पंचायती राज संगठन (RGPRS) के प्रदेश महासचिव और कांग्रेस नेता तरुण खटकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मनरेगा (MGNREGA) के नए अवतार ‘VB G RAM G’ को गरीबों के ‘काम के अधिकार’ पर प्रहार बताते हुए इसे मजदूरों को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलने की साजिश करार दिया है।

 

तरुण खटकर ने इस बदलाव के पांच घातक पहलुओं को उजागर करते हुए ग्रामीणों को सचेत किया है:

 

*1. अधिकार खत्म, अब सरकार की ‘मेहरबानी’ पर निर्भर*

खटकर ने कहा कि कांग्रेस शासन में मनरेगा के तहत काम मांगना एक कानूनी हक था, जिसमें 15 दिन के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था। लेकिन ‘VB G RAM G’ में अब काम तभी मिलेगा जब केंद्र सरकार किसी क्षेत्र को ‘अधिसूचित’ करेगी। यानी अब काम मजदूरों की मांग पर नहीं, बल्कि दिल्ली की मर्जी और बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

 

*2. 60 दिनों का ‘ब्लैकआउट’ भुखमरी की ओर कदम*

मजदूरों के लिए सबसे बड़ा संकट 60 दिनों का ‘ब्लैकआउट पीरियड’ है। खेती के पीक सीजन के दौरान सरकार दो महीनों तक कोई काम नहीं देगी। खटकर का आरोप है कि सरकार चाहती है कि मजदूर मजबूर होकर कम दाम पर पूंजीपतियों के पास काम करने जाएं।

 

*3. राज्यों पर डाला वित्तीय बोझ*

वित्तीय ढांचे में बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंनै बताया कि पहले केंद्र सरकार 90% मजदूरी देती थी। अब मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए राज्यों पर 40% मजदूरी का बोझ डाल रही है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए यह अतिरिक्त बोझ ग्रामीण विकास की गति को धीमा कर देगा।

 

*4. ग्राम सभाओं के अधिकारों पर ‘दिल्ली’ का कब्जा*

तरुण खटकर के अनुसार, 73वें संविधान संशोधन की मूल भावना को ठेस पहुंचाई जा रही है। पहले ग्राम सभाएं तय करती थीं कि गांव में क्या विकास होना है, लेकिन अब नए बिल के जरिए योजनाएं दिल्ली के अधिकारी तय करेंगे। इससे पंचायतों की स्वायत्तता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

 

*5. बायोमेट्रिक सिस्टम: तकनीक या मजदूरों का शोषण?*

उन्होंने अनिवार्य बायोमेट्रिक हाजिरी पर दुख जताते हुए कहा, “खेतों में कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों के हाथों की लकीरें घिस जाती हैं। यदि मशीन ने अंगूठा नहीं लिया, तो उन्हें काम और पैसे से वंचित कर दिया जाएगा।” उन्होंने इसे तकनीक नहीं, बल्कि मजदूरों को हक से दूर रखने का क्रूर हथियार बताया।

 

“यह लड़ाई सिर्फ मजदूरी की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और कानूनी अधिकार की है। मोदी सरकार मनरेगा को खत्म कर गरीबों को बेबस बनाना चाहती है।”

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