August 1, 2026

साइबर अपराध की विधिक शिविर में दी जानकारी।

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भटगांव 02 जून 2026 । शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के निर्देशानुसार एवं तालुका विधिक सेवा समिति भटगांव के अध्यक्ष माननीय न्यायाधीश पुनीतराम गुरुपंच के नेतृत्व में दिनांक 30/05/2026 दिन शनिवार कार्य दिवस में ग्राम गिरवानी,घाना व गधाभाठा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमे निम्न विषयों पर जानकारी प्रदान की गई – मोटर यान अधिनियम, पीड़ित क्षतिपूर्ति, सट्टा एवं जुआ प्रतिषेध अधिनियम, आबकारी एक्ट, घरेलू हिंसा के सम्बन्ध में जानकारी तथा नालसा (NALSA) द्वारा ‘तस्करी और वाणिज्यिक यौन शोषण के पीड़ितों के लिए विधिक सेवाएं योजना, 2015’ मुख्य रूप से उन लोगों की सहायता के लिए बनाई गई है जो मानव तस्करी और यौन शोषण का शिकार हुए हैं।इस योजना की मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

विधिक सहायता और न्याय: तस्करी के शिकार लोगों को मुफ्त कानूनी सलाह और वकील उपलब्ध कराना ताकि वे अपनी गरिमा और कानूनी अधिकारों की रक्षा कर सकें।रोकथाम और बचाव: समाज के कमजोर वर्गों को तस्करी के खतरों के प्रति जागरूक करना और उन्हें शोषण से बचाने के लिए कदम उठाना।

पुनर्वास (Rehabilitation): पीड़ितों को न केवल कानूनी सहायता देना, बल्कि उन्हें मुख्यधारा के समाज में वापस लाने के लिए शिक्षा, कौशल विकास और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों से जोड़ना।संवेदीकरण (Sensitization): पुलिस, वकीलों, न्यायपालिका और सरकारी कर्मचारियों को इन पीड़ितों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना।

मुआवजा: पीड़ितों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकारी योजनाओं के माध्यम से मुआवजा दिलाने में मदद करना।योजना के लाभ कैसे लें?पीड़ित या उनके प्रतिनिधि सहायता के लिए संबंधित जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) या राज्य के राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) से संपर्क कर सकते हैं।

बच्चों के लिए मैत्रीपूर्ण विधिकद सेवाएं क्या हैं?

बच्चों के लिए ‘बाल मैत्रीपूर्ण विधिक सेवा योजना’ से तात्पर्य आपराधिक, सिविल और प्रशासनिक कार्यवाहियों में बच्चों को विधिक सहायता प्रदान करना है, जो सुलभ, आयु-उपयुक्त, बहु-विषयक, प्रभावी हो तथा जो बच्चों की विधिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी हो ।

एसिड हमलों के पीड़ितों के लिए ‘नालसा (एसिड हमलों के पीड़ितों के लिए विधिक सेवाएँ) योजना – 2016’ चलाई जा रही है। इसके तहत पीड़ितों को मुफ्त वकील, आर्थिक मुआवजा (न्यूनतम 3 लाख रुपये) और पुनर्वास में सहायता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरण काम करते हैं।

इस योजना के तहत पीड़ितों को मिलने वाली मुख्य सुविधाओं और सहायता का विवरण इस प्रकार है:

1. मुफ्त विधिक सहायता (Legal Aid)पैनल वकील: पीड़ितों को कानूनी कार्यवाही के लिए निःशुल्क और सक्षम वकील उपलब्ध कराए जाते हैं।

सुलभ पहुँच: बिना किसी आय सीमा के किसी भी एसिड अटैक पीड़िता को जिला, राज्य या तालुक स्तर के विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से सीधे सहायता मिल सकती है।

2. आर्थिक मुआवजा और चिकित्सा (Compensation & Medical)न्यूनतम मुआवजा: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, राज्य सरकारों द्वारा प्रत्येक पीड़िता को कम से कम

3 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाना अनिवार्य है,

निःशुल्क इलाज: पीड़ितों के लिए मुफ्त चिकित्सा उपचार और आपातकालीन देखभाल का प्रावधान है तत्काल सहायता (Interim Compensation): मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता को तत्काल आर्थिक मदद भी दी जा सकती है।

3. शिकायत और संपर्क कैसे करें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA): पीड़ित अपने जिले के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) में आवेदन कर सकते हैं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण: सीधे अपने राज्य के विधिक सेवा प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।नालसा (NALSA): विस्तृत जानकारी और योजनाओं के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त साइबर अपराध के बारे में जानकारी प्रदान की गई जिसमे (Cybercrime) एक ऐसी अवैध आपराधिक गतिविधि है, जिसमें कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल फोन या किसी डिजिटल नेटवर्क का उपयोग या तो अपराध को अंजाम देने के लिए किया जाता है, या फिर उन्हें निशाना बनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा चोरी, ब्लैकमेलिंग या सिस्टम को नुकसान पहुंचाना होता है।साइबर अपराध मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud): बैंक या किसी सरकारी अधिकारी के रूप में फोन करके ओटीपी (OTP) या पासवर्ड पूछना, यूपीआई (UPI) के जरिए पैसे उड़ाना या फर्जी लोन ऐप्स के माध्यम से लोगों को लूटना।

हैकिंग (Hacking): किसी की अनुमति के बिना उसके सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल या कंप्यूटर सिस्टम को अपने नियंत्रण में ले लेना फ़िशिंग (Phishing): फर्जी ईमेल या मैसेज के जरिए लालच देकर या डराकर (जैसे- डिजिटल अरेस्ट) लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी चुराना।डेटा चोरी (Data Theft): किसी व्यक्ति या संस्था के महत्वपूर्ण दस्तावेजों, तस्वीरों या गुप्त जानकारियों को चुराना और उनका गलत इस्तेमाल करना सोशल मीडिया से जुड़े अपराध: किसी की फर्जी प्रोफाइल बनाना, मॉर्फ्ड (एडिट की गई) फोटो या वीडियो वायरल करना और साइबर स्टॉकिंग।रैंसमवेयर (Ransomware): एक खतरनाक वायरस जिसके जरिए हैकर्स सिस्टम को लॉक कर देते हैं और उसे खोलने के लिए फिरौती (Ransom) की मांग करते हैं।बचाव और शिकायत (Prevention and Reporting)साइबर अपराध से बचने के लिए कभी भी अनजान लोगों के साथ अपने बैंक विवरण, पासवर्ड या आधार कार्ड साझा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक (Link) पर क्लिक न करें।यदि आप किसी भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो त्वरित सहायता के लिए 1930 (साइबर हेल्पलाइन नंबर) पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। सम्बन्धी जानकारी प्रदान की गई। शिविर में ग्रामवासी एवं आमजन उपस्थित रहें जिसमे सहयोगी व्यस्थापक के रूप में पुलिस थाना भटगांव के आरक्षक परवेश खटकर, प्रतिधारण अधिवक्ता डगेश खटकर, PLV नरेश एवं कामदेव द्वारा अपनी सेवा प्रदान की गई ।

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