बिलासपुर संभाग के ग्रामीण अंचल में सर्वे से बड़ा खुलासा: मिडिल और लोअर क्लास का पैसा इलाज, शिक्षा, शराब और कोर्ट-कचहरी में स्वाहा।

बिलासपुर 13 सितंबर 2026 । संभाग के ग्रामीण अंचल में मिडिल और लोअर क्लास पर किए गए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस वर्ग की पूरी कमाई इलाज, शिक्षा, शराब और थाना-कोर्ट-कचहरी में ही खत्म हो रही है, जिससे बचत लगभग शून्य हो गई है और मिडिल क्लास लगातार गरीब होता जा रहा है।सर्वे में सामने आया कि परिवार का हर सदस्य सालभर में बचत करने की कोशिश करता है, लेकिन परिवार में किसी न किसी सदस्य के बीमार होने या हादसे के कारण पूरी बचत इलाज में लग जाती है। साथ ही बच्चों को अच्छी नौकरी दिलाने की चाह में महंगी तकनीकी और उच्च शिक्षा पर पैसा खर्च किया जा रहा है।

शिक्षा को लेकर भ्रम: 70% लोगों का मानना है कि निजी स्कूल में पढ़ाने से बच्चा होशियार होता है और जल्दी नौकरी मिलती है। जबकि 30% लोगों का कहना है कि पढ़ने वाला बच्चा सरकारी स्कूल में भी होशियार निकल जाता है, निजी-सरकारी से फर्क नहीं पड़ता। उच्च वर्ग की देखा-देखी में मिडिल क्लास अपने बच्चों को निजी स्कूल में डालकर फीस के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

स्वास्थ्य को लेकर डर: 65% गरीब और मिडिल क्लास परिवार इलाज के लिए सीधे निजी अस्पताल जाते हैं। उनका मानना है कि निजी में बेहतर इलाज और जल्दी आराम मिलता है, जबकि इसी चक्कर में उनकी सालभर की कमाई का बड़ा हिस्सा वहीं चला जाता है।
नशा और विवाद में बर्बादी: सर्वे में पाया गया कि दिनचर्या में शराब सेवन की लत बढ़ी है, जिस पर कमाई का 40% तक हिस्सा खर्च हो रहा है। वहीं जमीन और घरेलू विवाद के चलते 20% वार्षिक कमाई थाना और कोर्ट-कचहरी के चक्कर में खत्म हो रही है।
निष्कर्ष: सर्वे में शामिल लोगों ने कहा कि यदि देश में शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय निःशुल्क और सुलभ मिले तो मिडिल और लोअर क्लास की आधी से ज्यादा कमाई बच सकती है और वे गरीबी के दुष्चक्र से निकल सकते हैं।

संपादक सिद्धार्थ न्यूज़

