छत्तीसगढ़ में परिसीमन और महिला आरक्षण से बदल सकता है सियासी नक्शा, विधानसभा सीटें बढ़कर 135 होने की संभावना।
।। राजनीतिक विश्लेषक तरुण खटकर।।
राज्य में एक बार फिर परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।यदि संसद में यह बिल पारित होता है, तो छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और चुनावी तस्वीर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नए प्रस्ताव के मुताबिक छत्तीसगढ़ में विधानसभा की मौजूदा 90 सीटें है जो बढ़कर 135 हो सकती हैं, जिससे प्रदेश में करीब 45 नए निर्वाचन क्षेत्र बन सकते हैं।सीटों की इस बढ़ोतरी से राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीतियों, मौजूदा विधायकों के प्रभाव क्षेत्रों और नए दावेदारों की संभावनाओं पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
परिसीमन के अनुसार संभागवार सीटों का संभावित गणित-
बिलासपुर संभाग: 39 सीटें
रायपुर संभाग: 30 सीटें
दुर्ग संभाग: 30 सीटें
सरगुजा संभाग: 20 सीटें
बस्तर संभाग: 16 सीटें
कुल 135
संभाग वार सीटों के वर्तमान आंकड़े –
बिलासपुर संभाग:24
रायपुर संभाग:20
दुर्ग संभाग:20
सरगुजा संभाग:14
बस्तर संभाग:12
कुल 90
33%महिला आरक्षण -इस संभावित परिसीमन के बीच महिला आरक्षण का भी बेहद अहम है। यदि 135 सदस्यीय विधानसभा में एक-तिहाई सीटों पर महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान लागू होता है, तो करीब 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी, जबकि वर्तमान विधानसभा 90 में केवल 19 सीटें ही महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
नई चुनावी चुनौतियां – राजनीतिक दलों को नए क्षेत्रों में बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना और स्थानीय मुद्दों की पहचान करनी होगी।निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदलने से कई मौजूदा विधायकों के क्षेत्र कट सकते हैं, जिससे नए चेहरों और दावेदारों के लिए राह आसान हो सकती है।हालांकि यह पूरी प्रक्रिया संसद में पेश होने वाले अंतिम विधेयक और उसके नियमों पर निर्भर करेगी।
अगर परिसीमन हुआ तो – रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरी विस्तार वाले इलाकों से लेकर बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ क्षेत्रों तक इस बदलाव का असर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा।परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के पारित होने पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 2 सीटें और बलौदा बाजार-भाटापारा जिलों में तकरीबन 3 सीटें आनुपातिक रूप से बढ़ने की संभावना है, जो कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तय होगी। या 2027 में होने वाले जनगणना के आधार पर फिलहाल यदि छत्तीसगढ़ में विधानसभा की कुल सीटें 90 से बढ़कर 135 होती हैं, तो इसका सीधा लाभ इन दोनों जिलों को भी मिलेगा, क्योंकि यहां की जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर नए निर्वाचन क्षेत्र सृजित किए जाएंगे।
1. बलौदा बाजार-भाटापारा जिला
2011 की जनगणना के अनुसार बलौदा बाजार-भाटापारा जिले की कुल जनसंख्या लगभग 10.78 लाख (10,78,911) है।
वर्तमान में मतदान केंद्र की कुल संख्या:1105 है।
मतदाता: 821443 है।
सीटों की संभावित गणित: –
यह जिला रायपुर संभाग के अंतर्गत आता है (और रायपुर संभाग के लिए कुल 30 सीटे होने का अनुमानित गणित है)।
वर्तमान में बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में विधानसभा की 4 सीटें है (बलौदा बाजार, भाटापारा, कसडोल ,बिलाईगड विधानसभा का 140 मतदान केंद्र है, उनमें लगभग 2 से 3 नई सीटें और जुड़ सकती हैं, परिसीमन के बाद कुल सीटों की संख्या बढ़कर 6 से 7 के आसपास हो सकती है।
बढ़ने वाली संभावित सीटें – पलारी, सिमगा और (गिरौदपुरी +सोनाखान) जैसे नए सीटें बनने की पूरी संभावना है।
सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिला -वर्ष 2011 की जनगणना अनुसार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की कुल आबादी लगभग 6.07 लाख (6,07,434) है।
जिला के अनुसार कुल मतदान केंद्र: 651
विधानसभा के अनुसार 721
कुल मतदाता:509821
सीटों का संभावित गणित: यह जिला बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आता है (और बिलासपुर संभाग को कुल 39 संभावित सीटें मिलने का अनुमान है)। वर्तमान में इस संभाग में 24 सीटें है जिसमें बिलाईगढ़ और सारंगढ़ जैसी मुख्य सीटें हैं।
बढ़ने वाली संभावित सीटें -बरमकेला, भटगांव
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला में 1 से 2 नई सीटें बढ़ने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 3 से 4 हो सकती है।
महिला आरक्षण -यदि 135 सीटों पर एक-तिहाई 33% (यानी 45 सीटें) महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, तो इन दोनों जिलों में भी महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का कोटा बढ़ जाएगा, जिससे महिलाओं के लिए चुनावी मैदान में उतरने के अवसर काफी बढ़ जाएंगे।चूंकि यह पूरा आकलन 2011 के डेटा पर आधारित है, अभी 2027 में नया जनगणना होना बाकी है इसलिए अंतिम आंकड़े संसद से बिल पास होने के बाद तय होने वाले परिसीमन आयोग के नए मापदंडों पर ही पूरी तरह निर्भर करेंगे।

संपादक सिद्धार्थ न्यूज़
