जन संघर्ष मोर्चा छत्तीसगढ़ ने मताधिकार और नागरिक अधिकारों को छीनने वाले SIR को रद्द करने व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाकर उन पर मुकदमा चलाने की मांग की।

रायपुर,24 अक्टूबर 2026 । जन संघर्ष मोर्चा छत्तीसगढ़ एवं समान विचार वाले संगठनों द्वारा आज भिलाई के परिवार चौक में एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया।प्रदर्शन भारत में लोकतंत्र ,संविधान और सभी नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तत्काल रद्द करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाकर उन पर मुकदमा चलाने , बिना पारदर्शिता के मतदाता सूची से हटाए गए 14 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार को बहाल करने ,संविधान विरोधी छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 को वापस लेने की मांग पर केंद्रित था। जे एस एक ने कहा कि यह कानून राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय खासकर ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों को निशाने पर लेने के लिए बनाया गया है। साथ ही राज्य में असंवैधानिक रूप से थोपे जाने वाले समान नागरिक संहिता UCC को लागू न करने की शिद्दत से मांग भी इस प्रदर्शन में की गई।क्योंकि भाजपा सरकार की यह पहल साफ तौर पर मुसलमानों,आदिवासियों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को भारतीय संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों पर कुठाराघात है।अभी न तो देश में और न ही छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता UCC लागू करने का समय आया है।
प्रदर्शन में एक प्रमुख मांग भिलाई हॉस्पिटल सेक्टर में लंबे समय से निवास कर रहे 702 परिवारों को उनके घरों से राज्य सरकार और भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा जबरिया बेदखली को तुरंत रोकने और प्रभावित परिवारों का ससम्मान पुनर्वास करने की थी। प्रदर्शन में अध्यक्षता जन संघर्ष मोर्चा छत्तीसगढ़ संयोजक मंडल सदस्य प्रसाद राव ने की।संचालन मोर्चा के सदस्य एवं जाति उन्मूलन आंदोलन के अखिल भारतीय संयोजक कामरेड तुहिन ने किया।प्रमुख वक्ताओं में कामरेड जनकलाल ठाकुर पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा,कामरेड कलादास मोर्चा सदस्य एवं संयोजक छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मज़दूर कार्यकर्ता समिति,कामरेड सौरा राज्य सचिव भाकपा माले रेड स्टार,सविता बौद्ध संकल्पी संस्थापक छत्तीसगढ़ बुद्धिस्ट प्रचारक विंग,पार्षद चंद्रभान सिंह,साहित्यकार चंद्रकला तारम, मज़दूर नेता कामरेड रमाकांत,पास्टर चौआराम अध्यक्ष छत्तीसगढ़ मसीही विकास समिति,समाजसेवी सज्जाद हुसैन,नीरा डेहरिया संयोजक महिला मुक्ति मोर्चा,कामरेड आर एन यादव राज्य कमेटी सदस्य ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया TUCI, जयश्री बौद्ध छत्तीसगढ़ बुद्धिस्ट प्रचारक विंग,हॉस्पिटल सेक्टर आवास संघर्ष समिति की ओर से सुंदरिया जी एवं नारायण राव ने अपनी बात रखी। प्रदर्शन में क्रांतिकारी जन गीतों का प्रस्तुतीकरण किया गया और उपरोक्त मुद्दों पर गगनभेदी नारे लगाए गए।
वक्ताओं ने दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल के रूप में अधिसूचना से बाहर करने के आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि हम SIR के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों और युवाओं, के समर्थन में खड़े हैं। हम नागरिक समाज के लोग आज, 24 अक्टूबर 2026 को भिलाई परिवार चौक में एक प्रदर्शन के जरिए उपरोक्त मुद्दे पर जनता का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।इस प्रदर्शन के माध्यम से दिल्ली में पुलिस तथा RSS-BJP के भगवा आपराधिक तत्वों द्वारा प्रदर्शनकारियों, जिनमें युवा महिला छात्राएं भी शामिल हैं, के क्रूर दमन और उत्पीड़न के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया गया।दिल्ली पुलिस तथा RSS-BJP से जुड़े भगवा आपराधिक तत्वों द्वारा छात्राओं और पत्रकारों का यौन उत्पीड़न पूरे देश के लिए स्तब्धकारी और शर्मनाक है।यदि मोदी सरकार प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रखती है, तो पुरे देश की जागरूक जनता उनकी रक्षा के लिए आगे आने को मजबूर होंगे। प्रदर्शन में दिल्ली की इन घटनाओं की जांच कराने, दोषियों को गिरफ्तार करने तथा वर्दीधारी अधिकारियों और भगवा असामाजिक तत्वों सहित ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के लिए तत्काल कदम उठाने की सरकार से मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करना संविधान और कानून के शासन के विरुद्ध है। हम न्यायपालिका, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय भी शामिल है, की इस बात के लिए कड़ी आलोचना करते हैं कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रहे व्यापक अपराधों पर स्वतः संज्ञान नहीं लिया है।भारत में कोई भी वैधानिक कानून या नियम स्पष्ट रूप से पुलिस को नागरिकों को “नजरबंद” (हाउस अरेस्ट) रखने का अधिकार नहीं देता है। इसके बावजूद, गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर फासिस्ट मोदी सरकार के मार्गदर्शन में पुलिस का शांतिपूर्ण जन आंदोलनों का दमन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष रूप से उन राज्यों में, जहां “डबल इंजन भाजपा सरकारें” हैं जैसे कि छत्तीसगढ़ में पुलिस, भगवा गुंडों को संरक्षण दे रही है।छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्यकों खासकर ईसाइयों,मुसलमानों,आदिवासियों,दलितों,महिलाओं सहित राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर खुलेआम हमले किये जा रहे हैं।ईसाइयों के प्रार्थनास्थलों पर सुनियोजित रूप से बजरंग दल सरीखे भगवा गुंडाबाहिनी का राज्य सरकार की सरपरस्ती में आक्रमण हो रहा है। जन संगठनों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने के उनके अधिकार को किसी न किसी बहाने छीना जा रहा है। यह भारत के संविधान द्वारा सुनिश्चित नागरिकों के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के मार्गदर्शन में मोदी सरकार ने भारत को एक ‘पुलिस राज’ बना दिया है। प्रदर्शन में राज्य प्रायोजित आतंक और दमन का कड़ा विरोध किया गया तथा नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने के लिए उनके घरों में अवैध प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की गई । इस आशय की जानकारी जन संघर्ष मोर्चा छत्तीसगढ़ (JSM) के मंडल संयोजक तुहिन,नीरा, चौआराम ने दी।

संपादक सिद्धार्थ न्यूज़
