November 2, 2026

ठेकेदार ने निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से किया कम भुगतान, महिला मजदूर के साथ जानबूझकर किया जा रहा शोषण, श्रम कानूनों के उल्लंघन की शिकायत पर लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) ने श्रम विभाग से त्वरित जाँच एवं न्याय की माँग की।

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बिलासपुर 10 अक्टूबर 2026 । लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) के अध्यक्ष लखन सुबोध को एक ठेकेदार द्वारा महिला को कम मजदूरी देने और ज्यादा समय तक कार्य कराए जाने का आवेदन मिला । जिसमें दिल्ली पब्लिक स्कूल बिलासपुर के ठेकेदार शशि कुमार कौशिक के माध्यम से सफाई एवं अन्य कार्यों में संलग्न श्रीमती राजेश्वरी मिरी पति फिरतराम मिरी, निवासी वार्ड क्रमांक 8, नया मन्नाडोल, तिफरा, बिलासपुर को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम, अर्थात् केवल ₹183 प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया गया और इतना ही नहीं महिला से समय से अधिक कार्य कराया गया।जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है कि पीड़िता एक महिला मजदूर हैं और भारत में महिला श्रमिकों के साथ होने वाले शोषण की यह एक और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है। महिला मजदूरों को अक्सर उनकी कमजोर सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा की कमी और पारिवारिक दबावों का फायदा उठाते हुए शोषित किया जाता है। इस मामले में पीड़िता के साथ महिला होने के कारण जानबूझकर प्रताड़ना और शोषण किया गया।

बताया जा रहा है कि पीड़िता महिला मजदूर को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर (जो सफाई कर्मियों के लिए ₹300-350 प्रतिदिन के आसपास है) से काफी कम, केवल ₹183 प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया गया। महिला मजदूरों को अक्सर यह मानकर कम मजदूरी दी जाती है कि वे विरोध नहीं करेंगी। संबंधित ठेकेदार ने सोमवार से शनिवार तक 8.5 घंटे और रविवार को भी 6 घंटे का कार्य, बिना किसी अतिरिक्त भत्ते या ओवरटाइम भुगतान के मजदूरी कराता रहा। श्रम कानूनों के अंतर्गत नियमित साप्ताहिक अवकाश, त्योहारी अवकाश पर न्यूनतम मजदूरी का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित करना नियोक्ता एवं ठेकेदार की जिम्मेदारी होती है। किंतु पीड़िता को न तो नियमित अवकाश मिला और न ही लागू न्यूनतम मजदूरी दर के अनुरूप पूरा भुगतान हुआ।

जब पीड़िता ने ठेकेदार से मजदूरी की उचित माँग करतीं हैं तो उन्हें अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जाता, धमकियाँ दी जातीं, और कार्य के दौरान बार-बार टोका-टाकी की जाती है। मजदूरी की उचित माँग करने पर पीड़िता को कार्य से हटा दिया गया, जो कि श्रम अधिकारों का खुला उल्लंघन है और महिला मजदूर के विरुद्ध प्रतिशोध की कार्रवाई है। ठेकेदार द्वारा महिला मजदूर की कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए उन्हें कानूनी अधिकारों से वंचित रखा गया। पीड़िता द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक गणना के अनुसार, उनकी बकाया मजदूरी की अनुमानित राशि लगभग ₹1,13,000 (एक लाख तेरह हजार रुपये) बनती है, जो केवल प्रारंभिक अनुमान है और अंतिम जाँच एवं अभिलेखों के आधार पर वास्तविक राशि का निर्धारण होना आवश्यक है। लोक सिरजनहार यूनियन छत्तीसगढ़ के श्रमिकों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों, सफाईकर्मियों, महिला मजदूरों एवं ठेकेदारी प्रणाली में कार्यरत मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है।

यूनियन ने पूर्व में भी बंधुआ मजदूरी, न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान, महिला श्रमिकों के शोषण तथा श्रमिक शोषण के विरुद्ध हस्तक्षेप किया हैं। LSU ने श्रम विभाग से मांग की है कि श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर तथा पीड़ित श्रमिकों, विशेषकर महिला मजदूरों को न्याय दिलाने में त्वरित कार्यवाही करें। इस आशय की जानकारी LSU के संगठन सचिव सत्यवती भारती ने दी।

 

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