May 21, 2026

छत्तीसगढ़िया बनियार संघ ने मनाया पामगढ़ में श्रम दिवस। LSU अध्यक्ष लखन सुबोध के आतिथ्य में श्रमिकों के अधिकार पर हुई चर्चा।

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जांजगीर / पामगढ़ 18 मई 2026 । बीते दिनों सतनाम भवन, पामगढ़ में छत्तीसगढ़िया बनियार संघ (CBS) के तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर ,श्रम दिवस के अवसर पर सभा का भव्य आयोजन किया गया। सभा सुबह 11:00 बजे से आरंभ हुई और शाम 04:00 बजे तक चली, जिसमें सैकड़ों मजदूरों, किसानों, भूमिहीन अधिकांशतः अजा अजजा मजदूर और महिलाओं ने भाग लिया। छत्तीसगढ़िया बनियार संघ (CBS) ने लखन सुबोध अध्यक्ष लोक सिरजनहार यूनियन (LSU) एवं संयोजक –प्रवासी मजदूर संगठनों के संयुक्त मोर्च (PMSSM)को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता रामेश्वर कुर्रे- छत्तीसगढ़िया बनियार संघ (CBS) के महासचिव द्वारा की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवियित्री सुश्री आशा सुबोध (बिलासपुर), एड.रजनी सोरेन –(मानव अधिकार कार्यकर्ता बिलासपुर), वीरेंद्र भारद्वाज– LSU के महासचिव, अनिस चरन –इंटक मजदूर संघ तथा परमानंद नेताम –(अध्यक्ष– CBS), एड.सुनिश्चरण बिलासपुर उपस्थित रहे।

LSU के अध्यक्ष लखन सुबोध ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मजदूरों के अधिकार दिलाने वाले पुराने सभी प्रमुख श्रम‑कानूनों को भारतीय सरकार ने रद्द करके उन्हें केवल 4 नए “श्रम कोड” में समेट दिया है। ये 4 नए श्रम कोड मजदूरों के लिए अपने अधिकार खोने, बेगारी और ठेका व्यवस्था में धकेले जाने के नए ढांचे के रूप में काम कर रहे हैं। इन्होंने ने स्पष्ट किया कि इन 4 श्रम कोडों के तहत मजदूरों को संगठित होने, ट्रेड यूनियन बनाने, मजदूर संघों के माध्यम से अपने अधिकारों की ठोस मांग करने से प्रभावी ढंग से रोका जा रहा है। इसके बजाय पूंजीपतियों को धड़ल्ले से खुलेआम मजदूरों को गुलाम बनाने, उन्हें घटिया ठेका व्यवस्था में डालकर, कम वेतन, असुरक्षित काम और जबरन अतिरिक्त घंटों के काम में धकेला जा सकता है। इसलिए इन कानूनों को “मजदूर‑विरोधी, अपराधिक श्रम कोड” की संज्ञा दी गई। आशा सुबोध ने कहा कि आज भारत में RSS/भाजपा की सरकार धीरे‑धीरे देश को एक “हिंदू राष्ट्र” बनाने और मनुस्मृति‑आधारित वर्ण‑राज्य को वापस स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके अंतर्गत किसान, मजदूर, भूमिहीन श्रमिक और महिला को गुलाम बनाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे वे अपने अधिकारों से वंचित होकर शोषण का शिकार हो रहे हैं। एड रजनी सोरेन ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार अदानी–अंबानी जैसे पूंजीपतियों को देश के किसानों‑मजदूरों के जल‑जंगल‑जमीन और भूमि के नीचे दबे प्राकृतिक संपत्ति को सौंपा जा रहा है ताकि देश एक कर्ज़‑पूर्ण और कंगाल राज्य में बदल जाए। इसके परिणामस्वरूप मजदूर‑किसान दाने‑दाने के मोहताज होकर कुपोषण, भुखमरी और जबरन मजदूरी के शिकार बन सकें, ताकि उन्हें पूरी तरह से आधुनिक गुलाम बनाया जा सके।

रामेश्वर कुर्रे ने कहा कि आंबेडकरी संविधान से मिली आजादी के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव का निषेध), 16 (रोजगार में समान अवसर) तथा 23 (बेगारी व जबरन मजदूरी पर प्रतिबंध) को मेहनतकश एस सी, एस टी, ओबीसी वर्ग के लिए आजादी और अधिकार की आधारशिला बताया गया। इन्होंने कहा कि डॉ अम्बेडकर ने चेतावनी दी थी कि अगर यह देश हिंदू राष्ट्र बन गया तो यह देश के लिए सबसे बड़ी विपत्ति होगी । भाजपा देश में मनुस्मृति आधारित व्यवस्था को देश की जनता, मजदूरों पर थोपना चाहती है इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। इंटक के अनिस चरन तथा मजदूर संघ के परमानंद नेताम ने कहा कि मनुवादी व्यवस्था इंसान और समाज को बांटने का काम करती है जबकि संविधान देश की जनता, समाज, मजदूरों, किसानों, महिलाओं को समान अधिकार दिलाता है। देश में संविधान दृढ़ता पूर्वक लागू हो इसके लिए हमें संगठित होकर आंदोलन करना चाहिए। वहीं संघ के वीरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि आज RSS और भाजपा‑शासित शासन में मजदूर‑किसान के खिलाफ बनने वाले अपराधिक‑सी कानून, जबरन मजदूरी, भूमि विक्रय अधिग्रहण जैसे मामले बढ़े हैं जिस पर निरंतर बढ़ते जुल्मों के खिलाफ हमें सजग और मुखर रहना होगा। हर गांव, हर मोहल्ला और हर शहर में लोकतांत्रिक एवं अम्बेडकरी संविधान के आधार पर संगठन बनाकर इस व्यवस्था को ध्वस्त करना होगा। इस आशय की जानकारी LSU के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्यामचंद मिरी ने दी है।