बेजुबान कुत्तों को यदि समय पर भोजन, पानी और स्नेह मिलेगा तो शायद आक्रामक नहीं होंगे और न किसी को काटेंगे भी नहीं।
आजकल हमें ज्यादातर शिकायतें मिलती है कि इंसानों को कुत्ते काटते हैं। आज के अंक में हम कुत्तों के काटने और इसके कारण पर प्रकाश डालते हैं ताकि बेजुबान आक्रामक न हों और न ही किसी को कांटे। कुत्तों के आक्रामक के पीछे हम सब इंसान जिम्मेदार हैं।यदि इन्हें समय पर भोजन पानी दें तो ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।कुत्तों का इंसानों पर हमला करना कई कारण हो सकता है। मुख्य रूप से डर, आत्मरक्षा, क्षेत्रीय आक्रामकता (territoriality), या दर्द के कारण होता है। वे असुरक्षित महसूस करने, भोजन या बच्चों की रक्षा करने, या अचानक उकसावे (जैसे चोट या छेड़छाड़) पर प्रतिक्रियास्वरूप काटते हैं।कुत्तों के हमले के मुख्य कारण: डर और असुरक्षा (Fear): यदि कोई कुत्ता डरा हुआ महसूस करता है या उसे लगता है कि उसे खतरा है, तो वह आत्मरक्षा में काट सकता है।
क्षेत्रीय रक्षा (Territoriality): कुत्ते अपने इलाके (घर, गली) की रक्षा करते हैं। अनजान व्यक्ति के आने पर वे उसे खतरा मानकर हमला कर सकते हैं।
दर्द या बीमारी (Pain/Sickness): बीमार, घायल या दर्द में रहने वाला कुत्ता, जो आमतौर पर शांत हो, वह भी अचानक आक्रामक हो सकता है।
संसाधन की रक्षा (Resource Guarding): अपने भोजन, खिलौने या बच्चों (पिल्लों) के पास किसी को आते देख कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं।
शिकारी प्रवृत्ति (Prey Drive): दौड़ते हुए इंसान, साइकिल या वाहनों को देखकर कुत्तों में शिकार करने की सहज प्रवृत्ति जाग सकती है।
अचानक उत्तेजना या दुर्व्यवहार: कुत्तों को तंग करना, अचानक छूना या डराना भी हमले का कारण बनता है।बचाव और सावधानी:अजनबी या आवारा कुत्तों के बहुत करीब न जाएं।कुत्ते के खाते समय या सोते समय उसे परेशान न करें कुत्ता आक्रामक लगे तो भागें नहीं, बल्कि स्थिर रहें और धीरे-धीरे पीछे हटें।
गर्मियों में कुत्ते भूख,प्यास के कारण इंसानों पर हमला करते हैं इनके बच्चों को जब समय पर खाना नहीं मिलता है, अक्सर मारपीट करने,दुत्कारने से इनकी मानसिक स्थितियां खराब होने लगती है और ये काटना शुरू कर देता है।कुत्ता एक घरेलू पशु है इन्हें इंसान के आसपास रहना ज्यादा पसंद हैं इनको यदि समय पर भोजन,पानी दिया जाए तो गुस्से नहीं होंगे ये मिलनसार पशु है लोगों के पास घुलमिलकर रहते हैं किसी को नुकसान भी नहीं पहुंचाते।आज हर कोई इस ओर कम ध्यान देते हैं घर का खाना कूड़े दान, कचड़े गाड़ी में फेक देते हैं इससे भोजन ऐसे खराब अपशिष्ट बन जाता है।उसी बचे हुए भोजन को यदि कुत्ते , बिल्ली मवेशियों को खराब होने से पहले दे दिया जाए बिलखते इन जीवों के लिए बड़ा उपकार हो जाता है। अधिकांश घरों में देखा जाता है कि खाना खाने के बाद बचे हुए भोजन को बाहर फेंक देते हैं वहीं गर्मियों में इनके लिए पानी का प्रबंध भी नहीं करते। अपने घर के आसपास सीमेंट के पात्र, पानी टब, बाल्टियों में इन बेजुबानों के लिए यदि पानी की व्यवस्था किए जाएं तो काफी हद तक इनकी आक्रामकता समाप्त हो जाएगी।
हम देखते हैं कि रात में जब कुत्ते रोते हैं तो कोई अनहोनी होने की बात पर इन्हें लाठी लेकर भगाने का प्रयास करते हैं जबकि ऐसा नहीं है कुत्ते भी एक जीव है इन्हें भी जीने के लिए भोजन चाहिए होता है जब इनको भूख,प्यास लगती है तो वे भौंकते हैं, चिल्लाते हैं जिसे हम इंसान गलत समझते हैं। कई घरों में समझदार लोग होते हैं जो अपने घर में 1 – 2 मुट्ठी चावल इन जानवरों के लिए अतिरिक्त बनवा देते हैं और सीमेंट के पात्र में घर के आसपास पानी की व्यवस्था करते हैं जो धन्यवाद के हकदार होते हैं। कई घरों में लोग बचे हुए भोजन को कुत्ते, बिल्लियों को बिल्कुल नहीं देते हैं भले ही भोजन को कूड़े में फेंक देते हैं ऐसे लोगों का कहना है कि कुत्तों, बिल्लियों को भोजन देंगे तो गंदगी फैलाते हैं।ऐसे लोगों के चलते ही कुत्ते आक्रामक होते हैं। कुत्ते के काटने की शिकायत और पागलपन ऐसे लोग जिम्मेदार हैं जिसकी खामियाजा छोटे छोटे बच्चों को भुगतना पड़ता है। देखा जाए तो गर्मी के समय में बहुत कम घरों के लोग हैं जो पशु, मवेशियों और पक्षियों के लिए अपने अपने घरों के सामने, बाड़ी,आंगन में पानी रखते हैं।
एक्सपर्ट बताते हैं इन बेजुबानों को भोजन के साथ साथ प्रेम और स्नेह की जरूरत होती है ये इंसान के प्रेम और स्नेह के भूखे होते हैं। इनको दुत्कारने,मारपीट करने से इनके मस्तिष्क में रैबिज वायरस पनपता है इन्हें दुलारने,स्नेह से अपनापन महसूस होने पर इनके मेंटल हेल्थ ठीक होते हैं और धीरे धीरे रैबिज वायरस भी खत्म होते हैं।

संपादक सिद्धार्थ न्यूज़
