आर्थिक शोषण के खिलाफ 11 सितंबर को इंद्रावती भवन में प्रदर्शन।

रायपुर 09 सितम्बर 2026 । 05 सूत्रीय मांगो को लेकर छत्तीसगढ़ में 55 से ज्यादा कर्मचारी संगठनों ने लंबित मांगों को लेकर 11 सितंबर को इंद्रावती भवन में प्रदर्शन का ऐलान किया है। 86 महीने के एरियर्स, अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण, व्च्ै और कैशलेस इलाज जैसी मांगें प्रमुख हैं।छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और पेंशनर्स का गुस्सा अब सड़क पर दिखने वाला है। 55 से ज्यादा कर्मचारी संगठनों ने एक साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। ‘‘एक मांग-एक मंच अभियान’’ के तहत 11 सितंबर को इंद्रावती भवन में कर्मचारी सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।

एक मंच पर तीन वर्ग – प्रदर्शन में नियमित कर्मचारी, अनियमित कर्मचारी और पेंशनर्स एक साथ नजर आएंगे। 11 सितंबर को दोपहर भोजनावकाश के दौरान इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 पर प्रदर्शन होगा। कर्मचारियों का कहना है कि सिर्फ दिखावे का प्रदर्षन नही है। बल्कि सरकार को अपना लंबित मांगों की याद दिलाने की शुरुआत है।55 से ज्यादा कर्मचारी संघ साथ – अभियान का नेतृत्व छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया, छत्तीसगढ़ कोषालयीन कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ठाकुर और छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू कर रहे हैं। संगठनों का दावा है कि 55 से ज्यादा कर्मचारी संघ इस आंदोलन के समर्थन में हैं।

गारंटी याद दिलाई – कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर चुनावी वादे भूलने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले जारी ‘‘छत्तीसगढ़ के लिए मोदी की गारंटी 2023’’ में कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स के लिए कई वादे किए गए थे। अब कर्मचारी पूछ रहे हैं कि उन वादों पर अमल कब होगा? संगठनों का आरोप है कि मांगों को लगातार टालने से कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।पहली मांग 86 महिने का पैसा-
कर्मचारियों पेंशनरों की सबसे बड़ी मांग महंगाई भत्ते और बकाया महंगाई भत्ता एरियर्स को लेकर है। संगठनों ने जनवरी 2026 से देने और 86 महीने का बकाया एरियर्स देने की मांग रखी है। उनका कहना है कि लंबे समय से अटके इस पैसे का इंतजार कर्मचारी कर रहे हैं। अनियमितों को नौकरी की गारंटी –
दूसरी बड़ी मांग अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की है। संगठनों ने सेवा से निकाले गए कर्मचारियों को वापस लेने, कम मानदेय पाने वालों को न्यूनतम वेतन देने, विभिन्न संवर्ग के कर्मचारियों के वेतन विसंगति को दूर करने और अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालिक करने की मांग की है साथ ही आउटसोर्सिंग और ठेका व्यवस्था खत्म करने की बात कही है।
पेंशनरों को कैशलेस इलाज – नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी आंदोलन में शामिल है। स्वास्थ्य विभाग में लैब और फार्मेसी से जुड़ी ठेका व्यवस्था खत्म करने की मांग की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए मध्यप्रदेश की तर्ज पर 20 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा शुरू करने की मांग है। अब सरकार के जवाब का इंतजार है।कर्मचारी संगठनों ने साफ कर दिया है कि 11 सितंबर का प्रदर्शन उनकी पांच मांगों को लेकर सरकार को सीधा संदेश होगा। प्रदर्शन के बाद मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन दिया जाएगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन मांगों पर बातचीत का रास्ता खोलती है या कर्मचारी आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लेते हैं।

संपादक सिद्धार्थ न्यूज़

